दोस्तों आप सबका Waqt Shayari in Hindi के लेख पर स्वागत है।
समय (वक़्त) किसी का मोहताज नहीं है ये ऐसी चीज़ है जो न तो किसी के लिए रुकता है और न ही किसी की परवाह करता है। वक्त मस्त मौला है, वक्त ने सबके लिए वक्त बांध रखा होता है, वक्त किसी को फालतू वक्त नहीं देता और ना ही किसी के लिए रुकता है। जिसने वक्त की कदर कर ली तो समझो उसने वक्त का सही इस्तेमाल कर लिया।
वक्त हमे बहुत सारी चीज़े सीखाता है जैसे :- एक बार जो वक्त चला गया वो कभी वापस नहीं आता, वक्त से बढ़कर कुछ नहीं और वक्त से आगे कोई नहीं। तो ऐसे में वक़्त शायरी के ज़रिये हम वक्त की गहराई को समझेंगे, ताकि शायरी लवर न केवल शायरी पढ़ें बल्कि समय की वास्तविक कीमत को भी समझें।
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बुरे वक़्त पर शायरी: Waqt Shayari in Hindi
वक्त के दो पहलू है एक बुरा वक्त और दूसरा अच्छा वक्त। बुरा वक़्त की बात करे तो इंसान की असली परीक्षा का दौर यही वक्त होता है। इसी दौर में रिश्ते, दोस्ती और अपने-पराए की पहचान होती है। हमारे द्वारा वक़्त शायरी लोगो के दिल को सुकून देती है और हौसला बढ़ाती है।
हालात बुरे हैं इसलिए मौन हूँ अभी,
हिसाब सब होगा जब शान से उठूंगा कभी।
सूरज ढलता है, रात को बोलने दो,
मैं संभल जाऊँगा, बस वक़्त को गुजरने दो।
बुरा वक़्त भी है सिखों का खजाना,
अपनों के मुखौटे दिखा दे कौन है अनजाना।
हौसला मत छोड़, ये दौर भी टलेगा,
तपेगा कोयला, तभी हीरा बनेगा।
दौर ने बहुत चाहा मुझे गिराना,
माँ की दुआ ने सिखाया फिर से उड़ाना।
मुश्किलें तो राह में मेहमान सी आती,
ठोकरें ही अब मुझे पहचान सिखाती।

सिक्का हेड भी, टेल भी दिखाता,
पर बाजी वही जो ऊपर पलट आता।
अँधेरा घना हो, फिर भी डर नहीं,
एक दीपक काफी, अगर दिल में यक़ीन। राम-राम!
जो ना मिला, उसे कहानी बना कर छोड़ दे,
जो साथ है, उसे निशानी बना कर जोड़ ले।
बुरा दौर बस एक परीक्षा का पन्ना,
खुदा ने चुना है, तो तू भी चुन कोई अपना
अच्छे वक़्त की शायरी: सफलता और सब्र का संगम
जब अच्छा वक़्त आता है तो आपके आसपास लोगो की भीड़ होती है और आपको ये समझने में दिक्कत होती है की, कोण साथ है कौन नहीं। लेकिन समझदार लोग वही होते है जो अच्छे समय में समझदारी से काम लेते है।
सब्र से काटी हमने हर काली रात,
तभी तो ख्वाबों ने थामी हमारा साथ।
किस्मत चमकी नहीं, तपे हम अंदर से,
लोग देखें बस जीत, मेहनत ना देखे कोई
अँधेरा हटा, अब उजाले का राज,
सफलता से यारी, मेहनत का ताज।
चेहरे की चमक कोई जादू नहीं,
ये बरसों की तपस्या का है साज।
वक़्त बदले तो रुत भी बदल जाती,
खुशियाँ चलकर दर तक फिसल आती।
शुक्र है उस रब का जिसने राह लिखी,
सब्र वालों की किस्मत खुद गुनगुनाती।

जो गिराना चाहें, आज वो पीछे हैं,
हम वहाँ पहुँचे जहाँ सपने गहरे हैं।
ये दौर गुरूर का अध्याय नहीं,
ये सब्र से पाया हुआ सच्चा साया है।
मुश्किलें अब किनारे हटने लगी,
सफलता की धूप में घटने लगी।
फल झुके पेड़ पर ही पकते है,
जीत वही जहाँ नज़रें झुकने है।
वक़्त और रिश्ते: बदलते चेहरे, बदलती बातें
समय के वक़्त के साथ रिश्ते भी बदल जाते है, ये कहावत नहीं हकीकत है। जिसके साथ बीती होगी वही इस गम को समझ सकता है। बदलते चेहरे बदलती आदतें इंसान को इंसान को बहुत कुछ सीखा देता है। हमारी वक्त और रिश्ते शायरी में आपको वो ज़ज़्बात मिलेंगे जो आप ढून्ढ रहे थे।
वक़्त की कड़ी धूप में नक़ाब उतर जाते हैं,
जो अपने थे कहने वाले, वो अक्सर मुकर जाते हैं।
रिश्तों की पहचान अँधेरे में ही खुलती है,
वरना उजाले में तो दुश्मन भी संवर जाते हैं।
दौर बदले तो ज़ुबानों का रुख बदल जाता है,
अपने कहने वाला चेहरा भी बदल जाता है।
ज़रूरत तक हम थे सबसे ख़ास कहानी,
ज़रूरत खत्म तो किस्सा ही बदल जाता है।
अब रिश्ते घड़ी देख कर निभाए जाते हैं,
मतलब के लिए पुराने गीत गाए जाते हैं।
अच्छा वक़्त तो महफ़िल का राजा है,
बुरा वक्त आए तो अपने भी पराए जाते हैं।

वक़्त ने सिखाया दिल पढ़ना गहराई से,
मीठी बातों पे भरोसा अब विदाई से।
रूह से जुड़े हों तो रिश्ता अमर,
नाम के यारों को सलाम भी जुदाई से।
रिश्तों को वक़्त देकर बहुत बचाया था,
भूल गए कि वक़्त खुद ही पराया था।
जो छूट गए वो बोझ थे कहानी के,
जगह अब नई सुबह, नए साए के।
वक़्त की कदर पर शायरी: आज का सही उपयोग
जो लोग वक़्त की कदर नहीं करते, वक़्त उन्हें कभी माफ नहीं करता, ये कहावत आपने बहुत लोगो से सुनी होगी और ये लोग वही होते है जिन्होंने पहले कभी वक्त की कदर नहीं करू और जब ज़िन्दगी ये समझने में लग गयी की वक्त कितना ज़रूरी था तब उम्र ही निकल गयी। तो दोस्तों जो समझ गया वो हमारी शायरी को पढ़े और फॉलो करे।
वक़्त की क़ीमत समझ, ये लौट कर नहीं आता,
गुज़र जाए तो बस पछतावे का गीत सुनाता।
जो करना है आज कर, कल की रट छोड़ दे,
कल खुद भी कल ढूँढे, तू अपनी जीत जोड़ दे।
सोना–चाँदी फिर कमा, जेब भर जाएगी,
गया वक़्त कहाँ मिलेगा, रूह तरस जाएगी।
अमीर वही जो पल को सही राह दे,
हर लम्हा तरक्की लिखे, खुद्दारी की चाह दे।
कल बस किस्सा है, कल बस कहानी,
आने वाला कल अब भी है अनजानी रवानी।
आज को सही दिशा दे, यही असली कमाई,
ज़िंदगी पल की दीवानी, पल में ही भलाई।

दोष किस्मत को नहीं, वक़्त को पहचान दे,
अँधेरों में मत रुक, मेहनत को ही सम्मान दे।
सूरज सही पल निकले, तभी जगमगाता,
तू पल को साथ ले, तभी तू चमक पाता। राम–राम!
वक़्त संग चले तो दुनिया सलाम ठोके,
पीछे भागे तो ज़िंदगी इल्ज़ाम रोके।
हर सेकंड को सपनों की आग में डाल दे,
सफलता भी कहेगी—“चल, तेरा नाम उछाल दे!” गुड मॉर्निंग!
वक़्त और कर्म: जो बोओगे वही पाओगे
हमारे बड़े बुजुर्ग कहा करते थे कि, आपका आज का किया अच्छा या बुरा काम आपको कल भुगतना ही पड़ेगा। कर्म और समय का बड़ा गहरा संबंध है तो अपने कर्म को बड़ा करो। ऐसी ही बाते आपको नीचे शायरी के द्वारा मिलेंगे जो आपको मोटिवेट करेंगे।
वक़्त की अदालत में सिफ़ारिश नहीं चलती,
कर्मों की लिखावट कभी बारिश में नहीं गलती।
आज जो बोया है, कल वही कहानी बनेगी,
किस्मत भी उन्हीं की, जो मेहनत से ढलती।
कांटों से क्या रोना, जब बीज ही गलत बोया था,
वक़्त ने बस वही दिखाया, जो दिल में समाया था।
कर्म अच्छे कर, फल की चिंता छोड़ दे बंदे,
मालिक का फ़ैसला हमेशा सच के सांचे में ढोया था।
वक़्त गुज़र जाएगा, पर निशान बोलते रहेंगे,
अच्छे कर्म होंगे तो इंसान तोलते रहेंगे।
दुनिया से गलती छुपा भी ले तू अगर,
पर ऊपर वाले के पन्ने सब बोलते रहेंगे।

किस्मत का रोना छोड़, क़दम को धार दे,
कर्मों से बनता जहां, खुद को आकार दे।
वक़्त रोज मौका दे, सुधरने–संवरने का,
आज मेहनत लिख दे, कल आसमान तैयार दे।
दुनिया गोल पहिया, सब वापस आता है,
धोखा हो या प्यार, दर पर दस्तक लाता है।
वक़्त थोड़ा लगता, पर हिसाब पक्का होता,
कर्मों का फल हर चौखट, खुद चलकर आता है। सुप्रभात यारा!
वक़्त शायरी 2 लाइन: कम शब्द, गहरी बात
कुछ बातें कम शब्दों की होती है और उन बातों में बहुत गहराई होती है। यही बाते हम आपको शायरी के द्वारा बताने की कोशिश कर रहे है।
वक़्त दिखता नहीं, पर सच दिखा देता है,
ख़ामोश रहकर भी सब समझा देता है।
वक़्त ने सिखाया—ये किसी का नहीं होता,
जो इसे पकड़ ले, वही कभी नहीं रोता।
ज़िंदगी चलती रहे, क़दम ना रुकने देना,
वक़्त किसी के लिए नहीं, खुद को झुकने देना।
बुरा दौर भी आए, तो डरना नहीं,
नक़ली अपने दिखें, तो मरना नहीं।
वक़्त की चाल से कोई जीत ले,
तो वही पलट कर तक़दीर सींच दे।

सिक्का सबका उछले, पर ताज उसी का,
जो गिरकर उठे, अंदाज़ उसी का।
आज कड़वा सही, कल मीठा आएगा,
वक़्त का पहिया है, बस घूम जाएगा।

