राम राम भाइयों आप सबका स्वागत है Mausam Shayari in Hindi के लेख पर।
मौसम और शायरी का रिश्ता बहुत गहरा और खूबसूरत होता है जैसा मौसम होता है हमारी भावना भी उस वक़्त मौसम के हिसाब से होती है बदला हुआ मौसम हमारी भावनाओ को उजागर करता है गर्मी का मौसम हमे ठंडी – ठंडी हवा का मजा देती है और वही सर्दी का मौसम हमे गर्माहट का आनद देती है यह बदलता हुआ हर साल का मौसम हमे सिर्फ हमारे बी भारत में ही देखने मिलता है
हमारे भारत में सिर्फ एक मौसम नहीं होता बल्कि 3 – 4 मौसम है जो वक़्त के साथ बदलते रहते है और बदलते मौसम की खूबसूरत हमे नए – नए खुआब दे जाती है इसलिए ही आपको अलग – अलग भावनाओ की मौसम शायरी इन हिंदी का प्रेम और उम्मीद आपको अलग – अलग Feeling के साथ पढ़ने को मिलेगी, पढ़ने के साथ – साथ आप एहसास भी जुड़े है जो आपको अच्छा महसूस करवाएंगे।
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Mausam Shayari in Hindi :- बारिश पर शायरी (भीगे जज़्बातों की आवाज़)
बारिश पर शायरी भीगे जज़्बातों की आवाज़ हमारे दिल की आवाज होती है जो कभी प्यार का एहसास दिलाती है तो कभी टूटे दिल का दर्द बयां करती है।
बादल गरजे कड़क, बिजली करे धमक,
चाय की महक कड़क, मिट्टी की सुगंध महक।
शहर क्या समझेगा इस सावन की बात,
गाँव की मौज अलग, दिल धड़के बेधड़क।
छत से टपके पानी, याद टपके साथ,
माँ के पकोड़े गरम, बचपन की सौगात।
वो गलियों का खेल, वो कागज़ की नाव,
यादों के आगे फीका, शहर का हर जज़्बात।
खेत हरा-हरा, दिल भरा-भरा,
धरती की प्यास में आसमान खिला-खिला।
ये बारिश ना समझो, सोना बरसे आज,
कुदरत का इशारा, खुशियों का रिवाज।
Download Imageछतरी का ज्ञान नहीं, भीगना पहचान नहीं,
टोली यारों की, यही असली जहान नहीं।
जुकाम से डरे लोग, हम सावन में यही हाल,
भीगे कपड़ों में दिखे अपनी अलग शान बान।
आसमान नाचे, दिल की बात जगाये,
बूंद रूह छुए, गिले-शिकवे मिटायें।
ये पानी नहीं दोस्त, एहसासों का राग,
देसी शाम कहे–चलो महफ़िल सजाये आज।
सर्दी और ठंड पर शायरी: एहसासों की गर्माहट
बदला हुआ मौसम हमारे अंदर एक अलग ही एहसास की गर्माहट लेकर आता है सर्दी का मौसम चाय की चुस्की, रजाई की गर्माहट और धूप की किरण हमे सर्दी का मस्त मजा देते हैं।
तन काँपे ज़रूर, पर मन में आग लगे,
ठंड से भले, पर यादों का राग जगे।
अदरक वाली चाय में तेरा ज़िक्र घुले,
हर घूँट में लगे – जैसे तू पास खड़े।
कोहरा ओढ़ ले, पर याद न छुप पाये,
सर्द हवा आये, तेरा नाम गुनगुनाये।
दूरी बड़ी सही, पर दिल में गर्मी वही,
तेरी बातों की आँच, सर्द रात पिघलाये।
धूप का इंतज़ार, छत की कहानी बोले,
ठिठुरती हथेली भी तेरी निशानी खोले।
सर्द रात जमे, पर सुकून दिल में रहे,
प्यार के दो बोल भी सूरज जैसे डोले।
Download Imageलिहाफ, किताब और यादों का बसेरा,
हर पन्ना बोले – नाम बस तेरा-तेरा।
ठंड बाहर है, पर इश्क़ अंदर जवान,
दिल की गर्मी से सर्दी भी शर्माये जहान।
आओ यादों का अलाव आज जलाये,
पुरानी बातों में फिर रंग मिल जाये।
ठंड लाख पड़े, पर दिल जुड़े रहें,
महफिल देसी रहे, और प्यार अमर हो चले।
गर्मी और धूप पर शायरी: तपते जज़्बातों का बयान
गर्मी और धूप का मौसम बेचैनी उजागर करता है ताप्ती धुप हाले दिल के जज्बात बयान करते है इस मौसम में हमारे जज्बात भी तीखे होते है और हमारी लिखी गयी शायरी भी तीखी होगी।
सूरज की गर्मी ने शहर को सुला दिया,
खाली सड़कों को लू ने झुलसा दिया।
छाँव ढूंढे आँखें, साया ढूंढे पाँव,
तपती दोपहर ने एहसास जला दिया।
गला सूखा–सूखा, प्यास करे शोर,
छाँव की उम्मीद में बैठे कमजोर।
घड़े का पानी लगे अमृत समान,
धूप सिखाये – सुकून छुपा है कहीं और।
छत पे सोना, तारे गिनना रात,
कच्चा आम और दोस्तों का साथ।
वो गर्मी की छुट्टियाँ, वो मिट्टी का प्यार,
अब यादों में बसा है बचपन का गाँव।
Download Imageलू के बाद हवा लगे मीठी डगर,
थकान मिटे जैसे लगा हो मरहम का घर।
जलना भी जरूरी है निखरने के लिए,
सूरज ढले तो चाँद भी लगे हमसफ़र।
गर्मी बाहर, पर याद अंदर जवान,
दूर रहकर भी तू दिल का मकान।
दरिया किनारे बैठने की चाह सही,
पर दिल बोले – तू ही मेरा जहान।
पतझड़ और खामोशी की शायरी: टूटते पत्तों की कहानी
पतझड़ और खामोशी सिर्फ टूटते पत्तों की कहानी ही नहीं है बल्कि टूटते दिल की कहानी भी है पतझड़ और खामोशी हमे किसी से बिछड़ने का एहसास दिलाते है अकेलापन और खालीपन महसूस भी होता है।
पत्ता गिरे, पर जड़ से नाता निभाये,
चुप रहकर भी कहानी अपनी सुनाये।
पुराना झड़े तभी नया रंग चढ़े,
मौसम कहे – बदलना भी एक कला कहलाये।
राह में पत्ते बोले खड़-खड़ गीत,
बीते किस्सों की छेड़ दें पुरानी रीत।
जो कल तक डालों का गुरूर थे,
आज मिट्टी में मिलकर बने यादों की प्रीत।
बाहर सन्नाटा, अंदर छुपा शोर,
जैसे दर्द पुराना बैठा हो किसी और।
बहार में फूल सब बोल पड़ते हैं,
पर पतझड़ कहे – चुप रहकर भी दिल है मजबूत डोर।
Download Imageडाल खामोश, जैसे थक गया हो गाँव,
धूप के टशन ने बदल दिए थे पाँव।
जिन्होंने रंग बदला था हवा के डर से,
आज वही पत्ते कहें – विदाई भी सिखाती है ठहराव।
गिरना अंत नहीं, ये शुरुआत की चाल,
मिट्टी में मिलकर ही बने नया ख्याल।
धीर रख मुसाफ़िर इस उजड़े मौसम में,
यही वक्त है – फिर से उगने का कमाल।
बसंत और सुहावने मौसम की शायरी: नई शुरुआत का एहसास
बसंत और सुहावने मौसम का समय हमारे जीवन की एक नई शुरुआत मानी जाती है बसंत ऋतु हमें नई उम्मीद देती है और जीवन की ताजगी महसूस करवाती है।
बसंत की हवा में रंग चढ़ जाये,
फूल खिले तो दिल भी खिल जाये।
सरसों पीली ओढ़े खेतों में,
लगे जैसे धरती दुल्हन बन जाये।
पुराना ग़म हवा में उड़ जाये,
नई हँसी हर चेहरे जुड़ जाये।
ठंडी बयार करे दिल से बात,
खुशियों का मौसम सबको मुड़ आये।
भौंरा गाए फूलों के पास,
कली मुस्काये मन में उल्लास।
पतझड़ अब किस्सों में सिमटा,
बसंत लाया नया विश्वास।
Download Imageधूप हल्की, आसमान नीला,
दिल बोले फिर वही रंगीला।
कोयल कूके मीठी बोली,
दुनिया लगे फिर से सजीला।
हवा में तेरी खुशबू आये,
फूल भी तेरा नाम सुनाये।
इत्र का शौक नहीं हमें अब,
तेरी हँसी से बाग महक जाये।






