राम राम दोस्तों, आप सब का स्वागत है Rajput Shayari In Hindi के लेख पर।
राजपूत का होना सिर्फ नाम ही नहीं है बल्कि राजपूत होना मतलब शान, वीरता और स्वाभिमान का संगम है इतिहास के वक़्त राजपूत का नाम ही सब लोगो के लिए बहुत हुआ करता था और राजपूत होना ये जन्म पर आधारित था राजपूत की गाथा उनके आत्मसम्मान, बलिदान और त्याग के कारण जाने जाते थे। राजपूती कभी झूठ नहीं बोलते थे उनके द्वारा जो एक बार घोषणा हो गयी तो मतलब वो काम अब हो कर ही रहेगा फिर चाहे वो काम किसी भी तरह करना पड़े। राजपूत वाले लोग अपनी मर्यादा में रहना अच्छे से जानते है और अपनी जुबान के पके भी होते है।उनके द्वारा किया गया हर एक वादा पत्थर की लकीर होती है।
राजपूत शायरी का इतिहास और आत्मा उनकी वीरता के कारण बहादुर माना जाता है। राजपूत लोग वीरता, सम्मान, बलिदान, निडरता और संस्कृति के कारण उनका समाज में एक अलग ही रुतबा चलता था उनकी आन-बान-शान, स्वाभिमान ही उनकी पहचान थी।
Rajput Shayari In Hindi :- वीर रस में डूबी हुई राजपूत शायरी 2026
वीर रस में डूबी हुई राजपूत शायरी उनकी बहादुरी की पहचान है। जब भी हम राजपूत लोगो की बात करते है तो हमारे अंदर का अंदाज़ ही बदल जाता है। राजपूत लोग जिस भी समाज में रहते है उनकी रक्षा करना और उन के न्याय के खातिर लड़ना उन राजपूत की जिम्मेदारी होती है।
तलवार की धार और राजपूतों की पहचान,
पीढ़ियों से कायम है हमारी आन-बान-शान।
दब कर हमारी फितरत में कभी रहा नहीं,
हमें विरासत में मिला है सर झुका कर रहना नहीं।
सूरज की तपिश है राजपूती लहू में,
डर का नाम नहीं हमारे हर एक रग में।
हालात कितने भी मुश्किल क्यों न हो जाएँ,
जज़्बा वही रहता है, हर एक युग में।
राजपूती आन पर जब बात आ जाती है,
किस्मत भी रुख बदल कर देख जाती है।
दुश्मनी का सबक हमें मत पढ़ाओ,
हमारी खामोशी ही बहुत कुछ कह जाती है।

साल नया है, पर तेवर वही पुराने हैं,
वीरता के क़ायदे हमारे खून में समाए हैं।
लोग वक्त के साथ रंग बदल लेते हैं,
हम तो वो हैं जो नाम से ही पहचाने जाते हैं।
भीड़ का हिस्सा बनना हमें रास नहीं,
राजपूत हैं हम, झुकना हमारे बस की बात नहीं।
इतिहास आज भी हमारी गवाही देता है,
हम वो चाल चलते हैं जो हर किसी के बस की बात नहीं।
राजपूत एटीट्यूड शायरी 2026
जब हम राजपूत एटीट्यूड शायरी की बात करते है तो उनका एक अलग ही अंदाज़ देखने मिलता है। राजपूत लोगो के दिल में अपने समाज के प्रति बहुत प्रेम तो होता ही है लेकिन साथ ही साथ दुश्मन के प्रति लड़ने की हिम्मत भी होती है। उनका स्वाभिमान ही उनका असली आत्म सम्मान होता है।
हमें मिटाने की बातें बेकार करते हो,
हम वो राजपूत हैं जो नाम से जाने जाते है।
महफ़िल में शोर मचाने को अल्फ़ाज़ नहीं चाहिए,
हमारी पहचान ही काफी है, ये तुम भी जानते हो।
राजपूतों के दर पर डर का चलन नहीं,
हमारी दुनिया में झुकने का चलन नहीं।
लोग वक्त के साथ रंग बदल लेते हैं,
पर राजपूती तेवर कभी बदले नहीं।
राजपूती लहू है, जोश तो दिखेगा ही,
जो टकराएगा हमसे, सबक तो सीखेगा ही।
झुकाने के ख्वाब देखना छोड़ दो अब,
ये शेर है, अपनी शान में ही जियेगा ही।

साल नया है, पर रुतबा वही पुराना है,
राजपूताना शान का हर किस्सा जाना-पहचाना है।
दुनिया बदल जाए, जमाना पलट जाए,
हमें ललकारने का हुनर आज भी कम है।
हम दिलों पर राज करते हैं, दिखावे से नहीं,
राजपूत हैं हम, डरते किसी दबाव से नहीं।
एक नज़र ही काफी है माहौल समझाने को,
हम रास्ते बदलते हैं, अपना किरदार नहीं।
राजपूत प्रेम शायरी 2026
हम राजपूत हैं, दिल लगाना जानते हैं,
पर हर किसी पर मर जाना नहीं मानते हैं।
जिसे चाह लें, उसे दिल की रानी बनाते हैं,
हमारी मोहब्बत हमेशा मर्यादा में जानते है।
एक बार जो जुबां से वादा कर लिया,
फिर पीछे हटना हमने सीखा नहीं है।
दुनिया चाहे खिलाफ क्यों न खड़ी हो जाए,
राजपूत अपना वचन जान देकर भी निभाता है।
नखरे हमें पसंद हैं, बेवफाई नहीं,
दोस्ती में धोखा, इश्क़ में रुसवाई नहीं।
प्यार किया है तो ‘प्रेमी” बन कर निभाएंगे,
दिखावे वाली मोहब्बत हमें कभी भायी नहीं।

राजपूतों का दिल थोड़ा क़द्रदान होता है,
हमें वही पसंद है जिसमें स्वाभिमान होता है।
जो हमारी आन-बान-शान का मान रखे,
वही हमारे दिल की सच्ची राजपूताना होता है।
साल बदलेगा, दौर बदलेगा, जज़्बात नहीं,
राजपूती इश्क़ है ये, कोई सौदा-बाज़ी नहीं।
आजकल लोग प्यार में विकल्प ढूंढते हैं,
हम तो वो हैं जिन्हें तुम्हारे सिवा कुछ चाहिए नहीं।
राजपूत दर्द भरी शायरी 2026
राजपूत लोग अपनी मर्यादा में रहने वाले लोग होते है उनके दिल में जितना प्रेम होता है उतना ही दर्द भी छिपा होता है वह न ही अपना प्रेम किसी को दिखा सकते है और ही अपने दर्द को किसी को दिखा सकते है क्योकि अगर राजपूत ही कमजोर पड़ गए तो समाज को कौन हौसला और हिम्मत देगा।
हम राजपूत हैं, दर्द दिखाते नहीं,
आँखों में आँसू लाएँ, ये हमें भाते नहीं।
लोग घमंड समझ लेते हैं हमारी खामोशी को,
उन्हें क्या पता, हम कितने ज़ख़्म दिल में छुपाये बैठे है।
मोहब्बत हमने भी सच्ची निभाई थी,
किस्मत ने मगर अलग ही राह दिखाई थी।
मर्यादा की खातिर उसे खो दिया हमने,
राजपूती हैं, जुदा हुए तो भी शान बनाए रखी थी।
ये राजपूती दिल है, जल्दी झुकता नहीं,
पर एक बार टूट जाए तो फिर जुड़ता नहीं।
वक़्त ने ऐसा ज़ख़्म दिया है ऐ दोस्त,
कि अब दर्द भी हमें पहले जैसा चुभता नहीं।

साल बदला, लोग बदले, बदल गया ज़माना,
पर राजपूत के दिल का दर्द रहा वही पुराना।
हम हँस कर सबसे मिल लेते हैं इस कदर,
कि किसी को एहसास न हो, कितना टूटा है ये अफ़साना।
रोने नहीं देती ये शान-ओ-विरासत मेरी,
दर्द में भी मुस्कान सिखाती है फितरत मेरी।
सब समझते हैं हमें बेफ़िक्र और खुशमिज़ाज,
किसी ने नहीं जानी अंदर की तन्हाई गहरी मेरी।
किलों और इतिहास पर आधारित राजपूत शायरी
किलो और इतिहास पर आधारित राजपूत शायरी उनकी युद्ध के वक़्त लड़ी गयी लड़ाई से है। राजपूत द्वारा लड़ी गयी लड़ाई समाज के हित के लिए लड़ी गयी थी। एक बार अगर युद्ध की घोषणा हो गयी तो राजपूत कभी भी युद्ध से पीछे नहीं हटते थे ।वह अपने असुले के बहुत पक्के माने गए है।
ये ऊँचे किले, ये पत्थर आज भी बोलते हैं,
राजपूतों की वीरता के किस्से खोलते हैं।
इन दीवारों ने देखा है इतिहास का हर मोड़,
जहाँ दुश्मन भी हमारी शौर्य-गाथा बोलते हैं।
इतिहास साक्षी है चित्तौड़ की उस पावन आग का,
जहाँ सम्मान बड़ा था हर जीवन और सुहाग का।
शीश कटे, पर मस्तक कभी झुका नहीं,
ये अध्याय है राजपूती मर्यादा और त्याग का।
राजस्थान की मिट्टी में आज भी जज़्बात बसते हैं,
हर किले की दीवार में वीरता के गीत रचते हैं।
इन्हें पत्थर मत समझना, ये इतिहास की धड़कन हैं,
जिन्होंने सदियों से अपनी आन-शान सहेजते हैं।

हल्दीघाटी की मिट्टी आज भी कहानी कहती है,
महाराणा की तलवार आज भी स्वाभिमान लिखती है।
घास की रोटी खाई, पर सिर नहीं झुकाया,
ऐसी मिसाल सिर्फ राजपूती इतिहास रचती है।
हम उन किलों के वारिस हैं जहाँ हौसले ढले नहीं,
हमारे पुरखों जैसा जज़्बा कहीं और पला नहीं।
इतिहास के पन्नों पर नाम चमकता है आज भी,
राजपूताना वो मशाल है जो कभी बुझा नहीं।
राजपूत त्योहार और परंपरा शायरी 2026
राजपूत त्योहार और परंपरा बहुत ही अच्छी और सच्ची मानी गयी है राजपूत के जितने भी त्योहार मनाए जाते थे वह बहुत ही धूम – धाम से मनाये जाते थे और परम्परा के अनुसार ही त्योहार को मनाया जाता था।
दशहरे पर जब शस्त्रों को नमन करते हैं,
अपने पुरखों की वीर गाथा स्मरण करते हैं।
ये केवल हथियार नहीं, हमारा स्वाभिमान हैं,
हम राजपूत हैं, जो शस्त्रों से अपनी पहचान रखते हैं।
केसरिया बाना, सिर पर सजे जब साफ़े,
तब बढ़ जाती है राजपूती शान कई गुना माफ़े।
ये रंग नहीं, ये त्याग और बलिदान की निशानी है,
इसी केसरिया में लिखी हमारी पुरानी कहानी है।
हमारी परंपरा में अतिथि का सर्वोच्च स्थान है,
मेहमान-नवाज़ी ही राजपूतों की असली पहचान है।
दुश्मन भी यदि द्वार पर प्यासा आ जाए,
तो पहले पानी, क्योंकि मर्यादा हमारी शान है।

तीज की हरियाली हो या गणगौर का श्रृंगार,
बाईसराज की आभा से सज उठे हर दरबार।
मर्यादा में रहकर संस्कृति जो सँभालें,
वही तो राजपूताना विरासत को सजीव बनाएँ।
दुनिया बदले, दौर बदले, हम रीति नहीं छोड़ते,
हम राजपूत हैं, कभी अपनी मर्यादा नहीं तोड़ते।
साल 2026 में भी वही आन-बान रहेगी,
हम परंपराओं से कभी मुँह नहीं मोड़ते।
राजपूत शायरी 2 लाइन (Royal 2 Line Shayari) 2026
राजपूत का खून राज खून माना जाता था राजपूत को झुकना मंजूर नहीं था वह अपनी आन बान शान से समाज में चला करते थे राजपूत का इतिहास के समय नाम बहुत बड़ा माना जाता था। राजपूत में जन्म लेना जैसे की राजा के घर जन्म लेना।
हमारी शख्सियत का अंदाज़ तुम क्या नापोगे बावरे,
हम उन राहों से गुज़रते हैं जहाँ सन्नाटा भी ठहरे।
राजपूती लहू है, जोश लाज़मी आता है,
सच बोलते हैं हम, इसलिए असर दिखाता है।

भीड़ के साथ चलना हमारी फितरत नहीं दोस्तों,
हम वहाँ खड़े होते हैं जहाँ रास्ते बदलते हैं दोस्तों।
शोर नहीं करते, असर छोड़ जाते हैं,
हमारी मौजूदगी से ही हालात संभलते हैं दोस्तों।
वक़्त बदलेगा, साल बदलेगा, पर ढंग नहीं बदलेगा,
राजपूत का तेवर है ये, किसी दबाव में नहीं पिघलेगा।

